फिल्म का परिचय
इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म आवारापन 2, 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। नितिन कक्कड़ के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को विशेष फिल्म्स और विशेष भट्ट ने प्रोड्यूस किया है। यह 2007 की कल्ट फिल्म आवारापन का सीक्वल है, जिसे मोहित सूरी ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में इमरान हाशमी के अलावा दिशा पाटनी, शबाना आज़मी, पुरन गब्बी और सुविंदर विकी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 20 मिनट है।
सच कहूं तो आवारापन 2 देखते समय बार-बार एक ही बात मन में आती रही—कुछ चीजें वापस लानी नहीं चाहिए। यह फिल्म उन लोगों के लिए है जिन्होंने 2007 वाली आवारापन देखी है और उसके गाने आज भी सुनते हैं। लेकिन सिर्फ नोस्टैल्जिया से फिल्म नहीं चलती, उसके लिए कहानी भी चाहिए—और यहीं यह फिल्म पीछे छूट जाती है।
कहानी क्या है?
कहानी वहीं से शुरू होती है जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। शिवम पंडित (इमरान हाशमी) अभी भी आलिया (श्रेया सरन) की मौत का गम झेल रहा है। वह अपनी मृत प्रेमिका की कब्र पर जाता है और वहीं उसे एक नवजात बच्ची मिलती है। वह उसे अनाथालय में छोड़ आता है और उसका नाम आलिया रखता है। कुछ साल बाद पता चलता है कि बच्ची को गोद लेने वाले माता-पिता की हत्या कर दी गई है और उसे बैंकॉक में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के लिए भेज दिया गया है।
अब शिवम का एक ही मकसद है—आलिया को बचाना। वह बैंकॉक पहुंचता है और ज़ोरावर (पुरन गब्बी) के गैंग में घुसपैठ करता है। ज़ोरावर के साथ उसकी बहन ज़ारा (दिशा पाटनी) भी है, जो अपने भूत से लड़ रही है। दूसरी तरफ माफिया की गॉडमदर नफीसा (शबाना आज़मी) है। शिवम को अपने मिशन में कामयाब होना है, वरना वह दूसरी आलिया को भी खो देगा।
क्या अच्छा है फिल्म में?
इमरान हाशमी की परफॉर्मेंस इमरान हाशमी इस फिल्म की जान हैं। उन्होंने शिवम पंडित को उसी संयम, दर्द और गुस्से के साथ वापस लाया है जो पहली फिल्म में था। उनके चेहरे पर वह थकान और आंखों में वह खालीपन साफ दिखता है जो एक ऐसे इंसान का होता है जिसने सब कुछ खो दिया हो। फिल्म में उनके डायलॉग जैसे “मौत, मेरा उससे एक पुराना रिश्ता है, एक कर्ज़ है” सीधे दिल पर लगते हैं। एक समीक्षक ने लिखा है कि इमरान की स्मोल्डरिंग इंटेंसिटी और लंबे बालों वाला चार्म इस फिल्म को ऊपर उठाता है। मुझे तो कई सीन्स में लगा कि काश, स्क्रिप्ट भी इमरान की आंखों जितनी गहरी होती।
बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म का सबसे बड़ा हथियार इसका म्यूजिक है। तो फिर आओ का रीप्राइज वर्जन और “तेरा मेरा रिश्ता” के नए वर्जन ने पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। मिथुन का कंपोजिशन और मुस्तफा जाहिद की आवाज आज भी वही जादू चलाती है। यही वह चीज है जो आपको सीट पर बनाए रखती है।
विजुअल ट्रीटमेंट बैंकॉक की नाइटलाइफ और नियॉन लाइटिंग में शूट किए गए सीन विजुअली काफी शानदार लगते हैं। सिनेमेटोग्राफी कुछ जगहों पर इतनी अच्छी है कि आप सोचते हैं कि काश, कहानी भी इसी लेवल की होती।
शबाना आज़मी की मौजूदगी शबाना आज़मी माफिया की गॉडमदर के रोल में हैं और जब भी स्क्रीन पर आती हैं, अपनी छाप छोड़ जाती हैं। उनके डायलॉग और अंदाज में एक अलग ही बात है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि फिल्म उन्हें पूरा इस्तेमाल ही नहीं करती। एक समीक्षक ने लिखा है कि शबाना आज़मी का इतना बड़ा टैलेंट बर्बाद कर दिया गया। यह सच है—जब आपके पास शबाना आज़मी जैसी एक्टर हों और आप उन्हें सिर्फ कुछ सीन्स में दिखाएं, तो यह सिर्फ नाइंसाफी है।
क्या खराब है फिल्म में?
कहानी बेहद अनुमानित आवारापन 2 की सबसे बड़ी समस्या इसकी कहानी है। यह पूरी तरह से प्रेडिक्टेबल है। आप पहले ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कौन विलेन है, कौन मरेगा और कहानी कहां जाएगी। कई समीक्षकों ने इसे “टेकन मोड” में बनी फिल्म कहा है, यानी एक आदमी विदेश जाता है, गैंग में घुसता है और बच्चों को बचाता है। यह वही पुरानी फॉर्मूला है जिसे हम कई फिल्मों में देख चुके हैं। मुझे तो कई बार लगा कि काश, राइटर्स ने थोड़ी नई जमीन तोड़ने की कोशिश की होती।
नोस्टैल्जिया पर ज्यादा निर्भरता फिल्म बार-बार पहली फिल्म की याद दिलाती रहती है, लेकिन अपनी कोई नई भावनात्मक जमीन नहीं बना पाती। टेलीग्राफ इंडिया की समीक्षा में लिखा गया है कि नोस्टैल्जिया का अपना एक लिमिट होता है, और फिल्म उस लिमिट तक पहुंचकर भी कुछ नया नहीं दे पाती। पहली फिल्म में शिवम का दर्द असली था, यहां वह दर्द सिर्फ दोहराव बनकर रह जाता है। जब आप बार-बार पुरानी फिल्म के रेफरेंस देते हैं, तो दर्शक सोचने लगता है कि नई फिल्म में है क्या?
दिशा पाटनी की केमिस्ट्री दिशा पाटनी ज़ारा के किरदार में हैं, लेकिन उनका किरदार काफी अधूरा लिखा गया है। पहली फिल्म में रीमा (मृणालिनी शर्मा) और आलिया (श्रेया सरन) के किरदार लंबे समय तक याद रहते थे। ज़ारा के साथ ऐसा नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इमरान और दिशा के बीच केमिस्ट्री बिल्कुल काम नहीं करती। जब आप पहली फिल्म में शिवम और आलिया का रिश्ता देख चुके हैं, तो यहां वह भावना महसूस ही नहीं होती। दिशा ने कोशिश की है, लेकिन स्क्रिप्ट उनके किरदार को जो गहराई दे ही नहीं पाती, वहां वह क्या करें?
कमजोर विलेन पुरन गब्बी ज़ोरावर के किरदार में हैं, लेकिन वह कहीं भी डरावने नहीं लगते। पहली फिल्म में आशुतोष राणा का विलेन याद रहता था, यहां ज़ोरावर का किरदार बस एक और गैंगस्टर जैसा लगता है। एक समीक्षक ने लिखा कि सुविंदर विकी, जो ज़ोरावर के गुर्गे का किरदार निभा रहे हैं, विलेन से ज्यादा असरदार लगते हैं। यह विलेन के किरदार की सबसे बड़ी कमजोरी है—जब आपका विलेन डर न पैदा करे, तो हीरो की जीत का मजा ही नहीं आता।
बॉक्स ऑफिस का हाल
बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। फिल्म ने पहले दिन 22 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली। पहले वीकेंड में ही फिल्म ने इंडिया में 81.75 करोड़ नेट और वर्ल्डवाइड 110.10 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन कर लिया था। पांच दिनों में फिल्म ने इंडिया में 100.75 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर लिया और वर्ल्डवाइड ग्रॉस 144.13 करोड़ हो गया। 15 दिनों में फिल्म ने वर्ल्डवाइड *220.49 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया। यह इमरान हाशमी के करियर की सबसे बड़ी सोलो ओपनिंग और सबसे बड़ी हिट साबित हुई है। यह साबित करता है कि इमरान का स्टारडम अब भी बरकरार है और लोग उन्हें बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं।
निष्कर्ष
आवारापन 2 एक ऐसी फिल्म है जो नोस्टैल्जिया पर चलती है और इमरान हाशमी के कंधों पर टिकी है। अगर आप 2007 वाली आवारापन के फैन हैं और इमरान को उसी अंदाज में देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक है। म्यूजिक और इमरान की परफॉर्मेंस आपको थिएटर में बांधे रखती है। लेकिन अगर आप एक मजबूत कहानी, गहरे किरदार और पहली फिल्म जैसी भावनात्मक गहराई की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश करेगी। कुछ चीजें एक बार ही अच्छी लगती हैं, दोबारा वही जादू नहीं चलता—आवारापन 2 यह साबित करती है। कुल मिलाकर यह एक ऐसी फिल्म है जिसे आप एक बार आराम से देख सकते हैं, खासकर अगर आप इमरान हाशमी के फैन हैं।

