फिल्म का परिचय
यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में यश के अलावा कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे सितारे नजर आए थे। यह फिल्म यश की KGF चैप्टर 2 के बाद चार साल बाद की वापसी थी, और इसे पैन-इंडिया स्तर पर एक बहुत बड़ी फिल्म के तौर पर पेश किया गया था। लेकिन नतीजा वह नहीं निकला जिसकी उम्मीद की गई थी। सच कहूं तो जब आप KGF जैसी फिल्म के बाद चार साल तक दर्शकों को इंतजार कराते हैं, तो उम्मीदें आसमान छूती हैं और यही उम्मीदें इस फिल्म की सबसे बड़ी दुश्मन साबित हुईं। बॉक्स ऑफिस का सफर
धमाकेदार ओपनिंग
फिल्म ने पहले दिन ही जोरदार शुरुआत की। इंडिया में पहले दिन की नेट कलेक्शन करीब 101 करोड़ रुपये रही, जो कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़ी ओपनिंग में से एक थी और 2026 की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग थी। वर्ल्डवाइड लेवल पर भी पहले दिन का ग्रॉस करीब 140 से 145 करोड़ रुपये रहा। लगा कि यश की वापसी ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला दिया है। थिएटर्स में भीड़ देखकर लगा कि शायद यह फिल्म साल की सबसे बड़ी हिट बनने जा रही है।
दूसरे दिन से गिरावट
लेकिन यह तूफान ज्यादा देर नहीं चला। दूसरे दिन ही कलेक्शन में जबरदस्त गिरावट आई। फिल्म ने दूसरे दिन सिर्फ 37.65 करोड़ नेट कमाए, जो पहले दिन से लगभग 63% की गिरावट थी। तीसरे दिन यह आंकड़ा और गिरकर 26.60 करोड़ पर आ गया। चौथे दिन 25.15 करोड़ और पांचवें दिन 23 करोड़ नेट कलेक्शन रहा। यानी फिल्म हर दिन लुढ़कती चली गई। यह गिरावट इतनी तेज थी कि लगा जैसे दर्शकों ने पहले दिन ही फैसला कर लिया था कि दोबारा नहीं आना है।
पहला वीकेंड और पहला हफ्ता
पहले तीन दिनों में फिल्म ने इंडिया में करीब 165 करोड़ नेट कमाए। पहले हफ्ते (9 दिन) के अंत तक इंडिया में कुल ग्रॉस कलेक्शन 256.25 करोड़ रहा। दूसरे वीकेंड में फिल्म ने सिर्फ 6.75 करोड़ कमाए, जो ओपनिंग वीकेंड से लगभग 96% की गिरावट थी। 12 दिनों में फिल्म का इंडिया ग्रॉस 263 करोड़ तक पहुंचा। यह आंकड़ा सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन जब आप इसे फिल्म के बजट से तुलना करते हैं, तो तस्वीर साफ हो जाती है।
अंतिम आंकड़े
फिल्म का अंतिम इंडिया नेट कलेक्शन करीब 247 करोड़ रुपये रहा, जबकि वर्ल्डवाइड ग्रॉस 339 करोड़ रुपये
के आसपास बंद हुआ। ओवरसीज मार्केट में फिल्म ने सिर्फ 4.7 मिलियन डॉलर (करीब 45 करोड़ रुपये) कमाए, जो उम्मीद से बहुत कम था। इंग्लिश वर्जन तो और भी बुरा फ्लॉप रहा—पहले दिन सिर्फ 1.40 लाख रुपये कमाए और सिर्फ 11 शोज में लगभग 450 टिकट बिके। यह आंकड़े इतने शर्मनाक हैं कि अगर इन्हें किसी फिल्मी कहानी में दिखाया जाए, तो लोग कहेंगे कि यह तो असंभव है।
क्या यह फिल्म हिट है या फ्लॉप?
यहां असली कहानी शुरू होती है। फिल्म का बजट कभी आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह 500 करोड़ से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक का बताया जाता है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि फिल्म को लागत निकालने के लिए कम से कम 600 करोड़ रुपये की जरूरत थी। ऐसे में 339 करोड़ के वर्ल्डवाइड ग्रॉस के साथ फिल्म ने करीब 230 से 260 करोड़ रुपये का नुकसान किया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदिपुरुष से भी बड़ा फ्लॉप साबित हुई है। आदिपुरुष ने 550 करोड़ के बजट पर करीब 330 करोड़ नेट कमाए थे और लगभग 220 करोड़ का नुकसान हुआ था। टॉक्सिक का नुकसान उससे भी ज्यादा बताया जा रहा है। ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूटर फार्स फिल्म ने राइट्स के लिए 105 करोड़ रुपये का एडवांस दिया था, लेकिन ओवरसीज कलेक्शन सिर्फ 45 करोड़ के आसपास रहा—यानी डिस्ट्रीब्यूटर को भी करीब 60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह सिर्फ एक फिल्म का नहीं, पूरे ट्रेड का नुकसान है।
लोगों ने क्यों नहीं देखी फिल्म? नेगेटिव रिव्यूज और बुरा वर्ड ऑफ माउथ
फिल्म को आलोचकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन ज्यादातर नेगेटिव ही रही। ओपन मैगज़ीन ने इसे ए स्टैगरिंग एम्प्टीनेस कहा और 2/5 रेटिंग दी। मैशेबल मिडल ईस्ट ने 1.5/5 रेटिंग देते हुए लिखा कि फिल्म मिसोजिनी को मास अपील के नाम पर पेश करती है आलोचकों का मानना था कि फिल्म में स्टाइल है लेकिन सब्सटेंस नहीं, हिंसा और सेक्स की भरमार है लेकिन कहानी कमजोर है। और सच कहूं तो जब आप थिएटर में बैठकर दो घंटे बिताते हैं और बाहर निकलकर लगता है कि कुछ नया नहीं मिला, तो आप दूसरों को भी नहीं बताते कि जाकर देखो।
पहले दिन के बाद दर्शक भाग गए
रिव्यूज और वर्ड ऑफ माउथ का असर इतना जबरदस्त था कि फिल्म पहले दिन के बाद ही गिरने लगी। तीसरे दिन नोएडा के एक थिएटर में सुबह 9 बजे के शो में एक भी दर्शक नहीं था, और 10:30 बजे के शो में 300 सीटों वाले ऑडिटोरियम में सिर्फ 5 लोग बैठे थे। यह साफ बताता है कि फिल्म ने दर्शकों को बांधे नहीं रखा। जब 300 सीटों में सिर्फ 5 लोग हों, तो समझ लीजिए कि फिल्म का हाल क्या होगा।
बड़े बजट की मार
फिल्म का प्रोडक्शन बहुत बड़े स्तर पर किया गया था। भव्य सेट्स, स्टाइलिश एक्शन, बड़े सितारे सब कुछ था। लेकिन जब कहानी और इमोशनल कनेक्शन नहीं बन पाया, तो बड़ा बजट ही फिल्म की कब्र बन गया। एक बड़ी फिल्म के लिए जरूरी है कि दर्शक दूसरी बार भी थिएटर आएं, लेकिन टॉक्सिक के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। यह सीख हर बड़े स्टार और बड़े डायरेक्टर को याद रखनी चाहिए दर्शक अब सिर्फ नाम और बजट से थिएटर नहीं आते।
निष्कर्ष
टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स ने यह साबित कर दिया कि बड़ा स्टार, बड़ा बजट और बड़ा स्केल काफी नहीं होता। फिल्म ने पहले दिन 101 करोड़ कमाकर यह दिखा दिया कि यश का स्टारडम अब भी बरकरार है, लेकिन दूसरे दिन से जो गिरावट शुरू हुई, वह रुकने का नाम ही नहीं ले रही। करीब 500 से 1,000 करोड़ के बजट पर बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड सिर्फ 339 करोड़ कमाए, जिससे यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में से एक बन गई है। यह यश के लिए भी एक बड़ा झटका है, जिन्होंने KGF के बाद करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर यह फिल्म चुनी थी। अब देखना यह होगा कि यश अपनी अगली फिल्म के लिए क्या कदम उठाते हैं क्योंकि एक बात तो तय है, दर्शकों का भरोसा जीतना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।

