Thudakkam समीक्षा मुए थाई की शानदार शुरुआत, लेकिन “पापा के कैमियो” ने पीछे खींच लिया

Thudakkam समीक्षा मुए थाई की शानदार शुरुआत, लेकिन “पापा के कैमियो” ने पीछे खींच लिया

एक लाइन में अगर आप महिला-केंद्रित एक्शन थ्रिलर पसंद करते हैं, या यह देखना चाहते हैं कि मोहनलाल की बेटी में सच में दम है या नहीं, तो यह फिल्म देखने लायक है; लेकिन अगर आप “ज़बरदस्ती भावुक कैमियो” और “दूसरे हाफ में घिसे-पिटे फॉर्मूले” को बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो थोड़ी निराशा हो सकती है।

कहानी क्या है

मीनू (विस्मया मोहनलाल) एक 26 साल की आम लड़की है, जो केरल के इडुक्की इलाके में अपने दिव्यांग पिता के साथ रहती है। वह खुशमिजाज है, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है, और उसका सबसे बड़ा शौक है मुए थाई (Muay Thai)। एक रात, वह दो छात्राओं को सुरक्षित घर पहुंचाती है, लेकिन खुद एक खतरनाक अपराधी की नज़र में आ जाती है। वह अपराधी न सिर्फ उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, बल्कि पूरी घटना की वीडियो भी बना लेता है। मीनू भागने और पलटवार करने में कामयाब हो जाती है, लेकिन असली दुःस्वप्न तो अब शुरू होता है उस बंद, रूढ़िवादी पहाड़ी समुदाय में **पीड़िता को ही उंगली उठाकर देखा जाने लगता है

सबसे बड़ी ताकत विस्मया की मुए थाई सच में काम करती है

मोहनलाल की बेटी विस्मया मोहनलाल, 35 साल की उम्र में डेब्यू कर रही हैं यह बात अपने आप में मलयालम सिनेमा में चर्चा का विषय है। लेकिन असली चौंकाने वाली बात यह है कि वह सिर्फ अपने उपनाम के दम पर टिकी हुई “शो-पीस” नहीं हैं

उन्होंने कई साल मुए थाई की ट्रेनिंग ली है, और फिल्म में इसका पूरा फायदा उठाया गया है। एक्शन सीक्वेंस की कोरियोग्राफी उन्हें असली फाइटिंग स्किल्स दिखाने का मौका देती है। उनका शरीर का लचीलापन और पंच की ताकत एक समीक्षक ने लिखा कि यह “उनके पिता के पुराने एक्शन सीन की याद दिलाता है”। कई मीडिया का आम निष्कर्ष है वह एक्शन में सहज और भरोसेमंद हैं, और सच में पूरी फिल्म को संभालती हैं। NDTV की समीक्षा में लिखा गया “अंत में हमें एक्ट्रेस विस्मया दिखती हैं, ‘मोहनलाल की बेटी’ नहीं—इसका श्रेय निर्देशक को भी जाता है।.

विलेन आशीष जो एंटनी दूसरा सरप्राइज़ हैं। वह प्रोड्यूसर एंटनी पेरुम्बवूर के बेटे हैं, यानी विस्मया की तरह स्टार-किड, लेकिन पूरी फिल्म में उनके संवाद लगभग नहीं हैं। आँखों, खामोशी और बॉडी लैंग्वेज के दम पर उन्होंने एक मानसिक रूप से बीमार किलर को इतना असहज बना दिया है कि एक समीक्षक ने तो यहाँ तक कहा कि “पता ही नहीं चलता कि यह उनकी पहली फिल्म है”।

अच्छी बातें पहले हाफ का टेंशन सच में काम करता है

निर्देशक जूड एंटनी जोसेफ (जिन्होंने ऑस्कर एंट्री 2018 बनाई थी) ने पहले हाफ में बहुत अच्छा नियंत्रण दिखाया है। किरदारों की बुनाई जल्दबाजी में नहीं की गई, टेंशन धीरे-धीरे बढ़ता है, और इंटरवल तक दर्शक सीट से चिपके रहते हैं कि आगे क्या होगा। सिनेमैटोग्राफी ने इडुक्की की पहाड़ियों की खूबसूरती और वीरानेपन दोनों को पकड़ा है, और जेक्स बेजॉय का बैकग्राउंड स्कोर भी कई समीक्षाओं में तारीफ पा चुका है “टेंशन में जान डाल देता है”।

कमजोर बातें दूसरा हाफ गिर जाता है, कैमियो लय बिगाड़ देता है

समस्या दूसरे हाफ से शुरू होती है। पहले हाफ का साइकोलॉजिकल थ्रिलर, आगे चलकर स्टैंडर्ड “मास रिवेंज एंटरटेनर” बन जाता है। The Hindu की समीक्षा सीधी है: फिल्म का दूसरा हाफ “मास अपील के लिए मुड़ जाता है, मोहनलाल का कैमियो बहुत लंबा है और असल में फिल्म को दूसरी दिशा में ले जाता है”। Koimoi की समीक्षा और भी सख्त है उन्होंने लिखा कि फिल्म “अपने उस ‘सरकारी विज्ञापन जैसे उपदेश’ से ऊपर उठने के लिए जूझती है”, और उसे “जब चाहो वॉशरूम जाओ” रेटिंग दी।

मोहनलाल का कैमियो सबसे विवादित हिस्सा है।** वह एक मार्शल आर्ट्स गुरु का किरदार निभाते हैं और मीनू से कहते हैं “यह तुम्हारी शुरुआत (Thudakkam) है, अपने पिता को गर्व कराओ”। कई समीक्षकों ने इन संवादों को “साफ तौर पर फैन-सर्विस” बताया और कहा कि  इससे फिल्म का भावनात्मक असर कमजोर पड़ जाता है। एक समीक्षक ने सुझाव दिया अगर मोहनलाल का कैमियो रखना ही था, तो “संयम रखना ज्यादा असरदार होता”—जैसे फाइट सीन में मीनू को उनकी याद आने वाला सिर्फ एक पल काफी था।

कहानी में नयापन कम है।एक महिला के साथ हुई हिंसा के बाद उसके बदले की कहानी मलयालम सिनेमा में नई नहीं है। The Hindu ने लिखा कि पटकथा “उम्मीदों को तोड़ने या सरप्राइज़ देने के लिए ज्यादा कुछ नहीं करती”। मीनू को समुदाय द्वारा “चरित्रहीन” समझे जाने वाले सीन में सामाजिक आलोचना का इरादा तो है, लेकिन इसे कुछ कच्चे ढंग से निपटाया गया है।

 बॉक्स ऑफिस व्यावसायिक रूप से सफल

आलोचना दो ध्रुवों में बंटी है, लेकिन आंकड़े बहुत अच्छे हैं। बजट करीब 15 करोड़ रुपये, वैश्विक कमाई 41 करोड़ रुपये, भारत में नेट कलेक्शन 21.5 करोड़ रुपये। पहले दिन वैश्विक कमाई 6.8 करोड़ रुपये रही, जो महिला-केंद्रित मलयालम फिल्म की सबसे बड़ी ग्लोबल ओपनिंग बनी, कल्याणी प्रियदर्शन की Lokah को पीछे छोड़ते हुए। फिल्म पांच हफ्ते सिनेमाघरों में चली, फिर 18 सितंबर को Jio Hotstar पर रिलीज़ हुई, जिसमें हिंदी सहित कई भाषाओं के वर्जन उपलब्ध हैं।

 देखें या नहीं

अगर आप ऐसी एक्शन फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें हीरोइन सच में लड़ सकती है, तो ज़रूर देखें।** विस्मया के मुए थाई वाले एक्शन सीन मलयालम सिनेमा की महिला किरदारों में वाकई कम देखने को मिलते हैं, और “सिर्फ VFX नहीं, शरीर के दम पर” वाली यह फीलिंग असली है। आशीष के विलेन का डरावनापन भी असरदार है।

लेकिन अगर आप “स्टार-किड को पापा का सहारा” वाली बात से चिढ़ते हैं, या दूसरे हाफ के भावुक मोड़ को नापसंद करते हैं, तो बीच में सब्र खत्म हो सकता है। फिल्म का सबसे अफसोसजनक हिस्सा यह है कि यह मीनू के अपने संघर्ष और विकास पर ज्यादा फोकस कर सकती थी, लेकिन मोहनलाल के उस जोरदार कैमियो ने बेटी की चमक छीन ली। जैसा कि The Hindu का निष्कर्ष है अगर विस्मया की मार्शल आर्ट स्किल्स को इतने शानदार ढंग से शामिल न किया गया होता, तो Thudakkam एक और आम बदले की थ्रिलर होती। उसने इसे ‘पास होने लायक’ से ऊपर पहुंचा दिया।”

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