शुरुआत की बात करें तो
24 जुलाई 2026 को रिलीज़ हुई ‘चेन्नई लव स्टोरी’ एक तेलुगु रोमांटिक ड्रामा है, जिसे रवि नंबूरी ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में किरण अब्बावरम और श्री गौरी प्रिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसका निर्माण ‘बेबी’ (2024) जैसी नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म बनाने वाले साई राजेश और एसकेएन ने किया है। फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी से ठीक पहले उसका मंगेतर उसे छोड़ देता है। इस टूटन से उबरने के लिए वो चेन्नई जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात एक महत्वाकांक्षी फिल्ममेकर से होती है। फिल्म करीब 3 घंटे लंबी है।
कहानी और पटकथा
फिल्म की शुरुआत निवेदिता उर्फ निवि (श्री गौरी प्रिया) की टूटी शादी से होती है। उसका बॉयफ्रेंड अजय (त्रिगुण) शादी के मंडप से ही उसे छोड़कर चला जाता है। इस सदमे से निवि डिप्रेशन में चली जाती है और शराब की लत लगा लेती है। उसकी दोस्त उसे संभालने के लिए चेन्नई ले जाती हैं, जहाँ उसकी मुलाकात स्टीवन शंकर (किरण अब्बावरम) से होती है।
स्टीवन एक अनाथ लड़का है, जो फिल्म डायरेक्टर बनने का सपना लेकर चेन्नई आया है। शुरुआत में निवि और स्टीवन में अनबन होती है, लेकिन धीरे-धीरे स्टीवन की सादगी और देखभाल निवि का दिल जीत लेती है। दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं और शादी का फैसला करते हैं। लेकिन तभी कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आता है, जो सब कुछ बदल देता है।
श्री गौरी प्रिया
इस फिल्म की असली जान श्री गौरी प्रिया हैं। कई समीक्षकों ने उनके अभिनय को फिल्म का सबसे मजबूत पहलू बताया है। टूटे दिल वाली लड़की से लेकर धीरे-धीरे ज़िंदगी में वापस लौटने तक, उन्होंने हर इमोशन को बड़ी संजीदगी से निभाया है। खासतौर पर क्लोज़-अप शॉट्स में जब वो बिना डायलॉग के सिर्फ अपनी आँखों से दर्द बयां करती हैं, वो दृश्य दिल को छू जाते हैं।
किरण अब्बावरम
किरण अब्बावरम ने स्टीवन शंकर के किरदार में एक संयमित और प्यारा अभिनय किया है। वो एक ऐसे लड़के की भूमिका निभाते हैं जो बेहद भोला और निर्दोष है। किरण ने इस किरदार को बिना ओवर-एक्टिंग के बड़ी सहजता से जिया है। हालांकि कुछ समीक्षकों को लगता है कि उनके चेहरे पर भाव कम दिखते हैं।
अन्य कलाकार
त्रिगुण ने अजय के किरदार में अच्छा काम किया है। देवी प्रसाद और पी. वासु जैसे अनुभवी कलाकार अपनी छोटी भूमिकाओं में प्रभावी हैं।
रवि नंबूरी का निर्देशन
रवि नंबूरी की यह पहली फिल्म है, लेकिन उन्होंने कहानी को सरल और प्रभावी ढंग से पेश किया है। फिल्म का पहला हिस्सा काफी मजबूत है — कहीं भी बोरियत नहीं लगती। सबसे बड़ी खूबी ये है कि फिल्म में कई छोटे-छोटे सीन पहले हाफ में बोए जाते हैं और दूसरे हाफ में उनका भावनात्मक भुगतान होता है। जैसे होटल का लड़का जो अपने मरे हुए पिता से बातें करता है — शुरू में लगता है वो पागल है, लेकिन बाद में उस ट्रैक का अंत दिल छू लेता है।
संगीत
मणि शर्मा का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। कई भावनात्मक दृश्यों में संगीत ही उन्हें ऊँचाई देता है। ‘थोलीप्रेमे’ और ‘वदलने’ जैसे गाने फिल्म के मूड को बखूबी कैरी करते हैं।
कमजोरियाँ
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका दूसरा हाफ है। इंटरवल के बाद कहानी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और कई सीन खिंचे हुए लगते हैं। करीब 3 घंटे की लंबाई कुछ जगहों पर भारी पड़ती है। अगर 10-15 मिनट की एडिटिंग होती तो फिल्म और बेहतर बन सकती थी।
दूसरी बात, क्लाइमैक्स काफी अनुमानित है। जहाँ फिल्म का पहला हाफ आपको चौंकाता है, वहीं अंत में आप पहले ही अंदाजा लगा चुके होते हैं कि क्या होने वाला है। कुछ समीक्षकों का मानना है कि फिल्म का दूसरा हाफ उतना भावनात्मक नहीं है जितना पहला।
क्या देखें, क्या न देखें?
अगर आप भावनात्मक लव स्टोरी पसंद करते हैं और ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं जो दिल को छू जाएँ, तो ‘चेन्नई लव स्टोरी’ आपके लिए है। श्री गौरी प्रिया का अभिनय और मणि शर्मा का संगीत इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं। लेकिन अगर आप तेज़ रफ्तार और बेहतरीन क्लाइमैक्स वाली फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, तो दूसरा हाफ आपको निराश कर सकता है।
निष्कर्ष
‘चेन्नई लव स्टोरी’ एक ईमानदार फिल्म है। ये टूटे दिल से जूझ रहे एक इंसान की कहानी है, जो धीरे-धीरे ज़िंदगी में वापस लौटना सीखता है। फिल्म ये नहीं बताती कि प्यार सब कुछ ठीक कर देता है, बल्कि ये दिखाती है कि कभी-कभी एक अजनबी ही आपको खुद से मिलवा देता है। कुछ खामियों के बावजूद, ये एक ऐसी फिल्म है जो देखने के बाद भी कुछ देर तक आपके साथ रहती है।

