अरे दोस्तों, अगर आप अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी को स्क्रीन पर देखने का 18 साल से इंतज़ार कर रहे थे, तो वो इंतज़ार तो आखिरकार खत्म हो गया। लेकिन सच कहूं तो ये फिल्म उस लंबे इंतज़ार का फल नहीं दे पाई। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी 《हैवान》 11 सितंबर 2026 को रिलीज़ हुई, और ये असल में उनकी ही 2016 की मलयालम फिल्म 《ओप्पम》 का हिंदी रीमेक है। फिल्म का बजट करीब 130 करोड़ रुपये था, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ये बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई।
तो कहानी क्या है?
फिल्म की शुरुआत एक ठंडे और डरावने सीन से होती है, जिसमें अक्षय कुमार का किरदार एक लाश को नदी में फेंकता है। इसके बाद कहानी श्याम राणे (सैफ अली खान) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक दृष्टिहीन व्यक्ति है, लेकिन उसकी सूंघने और सुनने की शक्ति बेहद तेज़ है। वो मुंबई की एक हाइराइज़ सोसाइटी में केयरटेकर का काम करता है।
सोसाइटी में रहने वाले एक रिटायर्ड जज (बोमन ईरानी) उसे बताते हैं कि उन्होंने किसी को गलत तरीके से जेल में डाल दिया था। वो व्यक्ति परशुराम (अक्षय कुमार) है, जिसकी पूरी फैमिली उस सजा के चलते खत्म हो गई। अब परशुराम जेल से बाहर आकर बदला लेने निकला है। जब जज की हत्या हो जाती है और श्याम पर इल्ज़ाम लगता है, तो उसे जज की छुपी हुई बेटी नंदिनी को बचाने के लिए परशुराम से भिड़ना पड़ता है।
अभिनय
सैफ अली खान
सैफ इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक दृष्टिहीन व्यक्ति का किरदार निभाना आसान नहीं है, लेकिन सैफ ने इसे बड़ी संजीदगी से निभाया है। उनका किरदार न सिर्फ सूंघने और सुनने की शक्ति से लैस है, बल्कि मार्शल आर्ट्स में भी माहिर है। कुछ समीक्षकों का मानना है कि सैफ ने मोहनलाल की नकल करने की कोशिश नहीं की, और यही उनके अभिनय की सबसे बड़ी खूबी है।
अक्षय कुमार
अक्षय ने इस फिल्म में अपने करियर का एक अलग मोड़ लिया है। वो आमतौर पर कॉमेडी और एक्शन में दिखते हैं, लेकिन यहां वो एक साइको किलर की भूमिका में हैं। कुछ दर्शकों ने उनके अभिनय को “डरावना और शानदार” बताया है। लेकिन कुछ समीक्षकों को लगता है कि उनका अभिनय ओवर-द-टॉप है। एक समीक्षक ने तो यहां तक लिखा कि अक्षय का “साइको किलर बनने का तरीका सिर्फ ज़ोर-ज़ोर से हंसना है, जैसे वो किसी नाटक में रावण का किरदार निभा रहे हों”।
अन्य कलाकार
बोमन ईरानी, स्वर्गीय असरानी, श्रेया पिलगांवकर और सैयामी खेर ने अपनी-अपनी छोटी भूमिकाओं में ठीक काम किया है। असरानी की कॉमिक टाइमिंग फिल्म में थोड़ी राहत देती है।
निर्देशन और तकनीकी पहलू
प्रियदर्शन ने इस फिल्म को बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये है कि फिल्म बहुत ज़्यादा स्टफ्ड है। 2 घंटे 45 मिनट की इस फिल्म में इतनी सारी सबप्लॉट्स हैं कि आप कभी-कभी भूल जाते हैं कि असल कहानी क्या है। श्याम की बहन की शादी, सोसाइटी में एक मेड की मैरिड लाइफ, दो यंग कपल्स का ट्रैक — ये सब कुछ है, लेकिन इनमें से कोई भी मुख्य कहानी को आगे नहीं बढ़ाता।
बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन
ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। पहले दिन इसने सिर्फ 3 करोड़ रुपये की कमाई की, और 8 दिनों में कुल 9.86 करोड़ रुपये नेट इंडिया में कमाए। वर्ल्डवाइड कलेक्शन सिर्फ 14.98 करोड़ रुपये रहा, जो इसके 130 करोड़ के बजट के मुकाबले बेहद निराशाजनक है। प्रियदर्शन ने खुद माना है कि दर्शक उन्हें और अक्षय को कॉमेडी के बाहर नहीं देखना चाहते।
क्या देखें, क्या न देखें?
अगर आप सैफ और अक्षय की जोड़ी को स्क्रीन पर देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक हो सकती है। सैफ का अभिनय और कुछ टेंशन वाले सीन फिल्म को थोड़ा उबार ले जाते हैं। लेकिन अगर आप एक साफ-सुथरी, तेज़ रफ्तार थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो ये फिल्म आपको निराश करेगी। इसकी धीमी गति, बेतुका क्लाइमैक्स और ओवरस्टफ्ड स्क्रिप्ट इसे एक थकाऊ अनुभव बना देती हैं।
निष्कर्ष
《हैवान》 एक ऐसी फिल्म है जो दो बड़े सितारों और एक अनुभवी निर्देशक के होते हुए भी अपना जादू नहीं बिखेर पाती। सैफ अली खान ने अपनी भूमिका में पूरी मेहनत की है, लेकिन फिल्म का लेखन और दूसरा हाफ उन्हें न्याय नहीं दे पाता। प्रियदर्शन के लिए ये उनकी ही फिल्म का कमज़ोर रीमेक साबित हुई। अगर आपने मलयालम 《ओप्पम》 देखी है, तो आप इस फिल्म को स्किप कर सकते हैं। और अगर नहीं देखी, तो भी सोच-समझकर ही टिकट लें।

